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केजरीवाल की राजनीति और इमानदारी..!

आंदोलन आंदोलन से निकला एक ऐसा व्यक्ति जिन्होंने भारतीय राजनीतिक में कुछ समय के लिए भूचाल ला कर रख दिया था हम बात कर रहे हैं उस शख्स की जो वर्तमान में दिल्ली के मुख्यमंत्री हैं बात कर रहे हैं अरविंद केजरीवाल की !आज से ठीक 10 साल पहले जब लोग कांग्रेस के भ्रष्ट सिस्टम से परेशान थे जगह-जगह लूट मारी भ्रष्टाचार व्यापक स्तर तक था तब एक आंदोलन ने जन्म लिया अन्ना आंदोलन उसे अन्ना आंदोलन के उपज थे |

अरविंद केजरीवाल और उसी आंदोलन के बदौलत अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के कुर्सी तक का सफर तय किया लोकपाल के नियुक्ति के लिए अन्ना हजारे ने राम दिल्ली के रामलीला मैदान में अनशन पर बैठे गए जिनमें कुमार विश्वास मनीष सिसोदिया और अरविंद केजरीवाल मंच का संचालन कर रहे थे और उसी मंच से अरविंद केजरीवाल इस बात का ऐलान कर रहे थे कि कोई भी राजनीतिक पार्टी दूध की धुली भी नहीं है उन्होंने भ्रष्टाचार के मामले में लगभग सभी राजनीतिक पार्टियों को खेड़ा था सभी के ऊपर भ्रष्टाचार में सम्मिलित का इल्जाम लगाए थे लोकपाल की नियुक्ति के लिए जो आंदोलन या अनशन अन्ना हजारे ने किया था उसे दमन करने के लिए हर वह रास्ता अपनाया गया जो कतई उचित नहीं था 10 से 15 दिन के बाद कोई ठोस नतीजा नहीं निकलने पर अनशन को स्थगित किया गया था और उसी जगह से अरविंद केजरीवाल ने इन भ्रष्ट पार्टियों के खिलाफ चुनाव लड़ने और पार्टी बनाने की इच्छा जाहिर की र्थ उन्होंने आम आदमी पार्टी नामक एक पार्टी भी बनाई और चुनाव के समय में उन्होंने लोगों को जाकर या बोला था कि बीजेपी और कांग्रेस दोनों मिले हुए हैं दोनों चोर पार्टी है शीला दीक्षित के खिलाफ एक सौ पन्नों का सबूत है इसलिए आप हमें वोट दें केजरीवाल ने जनता से वादा किया था कि वह मुख्यमंत्री बनने के बाद सरकारी बांग्ला व तमाम तरह की सुविधा नहीं लेंगे बिजली हाफ पानी माफ का भी नारा खूब जोर से चला गया चुनाव हुए लोगों ने पूर्ण बहुमत से केजरीवाल को दिल्ली की मुख्यमंत्री चुना लेकिन लेकिन अमूमन वही हुआ जिस बात का डर था चुनाव के बाद एक आंदोलन चुनाव के भेंट चढ़ गया आंदोलन से केजरीवाल राजनीतिक बन गए और जनता से किए गए सभी बातों के ठीक विपरीत कार्य किए उन्होंने सरकारी बांग्ला भी लिया हर वह तमाम तरह के सुविधा लिए जो एक मुख्यमंत्री को मिलता है हां चुनाव जितने के उद्देश से उन्होंने बिजली आप और पानी माफ जरूर किया उन्होंने जनता से वादा किया था कि 100 दिनों के अंदर सरकार बनते ही शीला दीक्षित जेल के अंदर होगी और वक्त का तकाजा देखी आज फिर शीला दीक्षित से गले मिल रहे हैं खुले आम बोल रहे हैं कि मुझे किसी भी हद तक जाना पड़े मोदी और अमित शाह को हराने के लिए तो वह किसी भी हद तक जाएंगे व कांग्रेस से भी समझौता कर लेंगे और यह सवाल उठता है कि क्या इन दिनों के लिए जनता ने केजरीवाल को चुना था |

क्या मुश्किल होगा मोदी का डगर

मजबूरी य देश के हित में महागठबंधन