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गरीब स्वर्ण आरक्षण मजबूरी य जरूरत?

जब देश आजाद हुआ था तब इस देश में वास्तविक रूप से कुछ लोग सही में आरक्षण पाने के हकदार थे जब देश आजाद हुआ तो उस संविधान को बनाने की जिम्मा बहुत सारे महापुरुषों के हाथ में दी गई उनमें से एक थे भीमराव अंबेडकर यो पहले ड्राफ्टिंग कमेटी के चेयरमैन उन्होंने पिछड़ा अति पिछड़ा समाज के दबे कुचले लोगों को समाज में बराबरी के लिए सिर्फ 10 साल तक के लिए आरक्षण दिए थे और बोला गया था उसके बाद विचार किया जाना चाहिए कि आगे आरक्षण को बढ़ाया जा या नहीं लेकिन हमारे देश के चंद नेताओं ने आरक्षण को अपना वोट बैंक के रूप में समझ कर इस देश को बर्बाद करने का काम किया फल स्वरूप चुनाव जीतने के हथकंडे को अपनाने के लिए इन पार्टियों ने आरक्षण के दायरे को अपने मन मर्जी के मुताबिक अपना हित साधने के लिए आरक्षण के कोटो को बढ़ाया | 


आज देश में प्रतिभाग का हनन हो रहा है और जो कुछ लोग आरक्षण का मजा ले चुके हैं आज भी उस पर काबिज हैं दो तीन पीढ़ियों तक आरक्षण का मजा ले रहे हैं और वस्तु तो जो गरीब है वह गरीब होता ही जा रहा हालात यह है कि सामान्य वर्ग के बच्चों का भी हाल बद से बदतर होते चला जा रहा है क्योंकि गरीबी जात पात देखकर नहीं आती है अभी ताजा तरीन मामला क्या है कि बीजेपी सरकार ने 10 फ़ीसदी आरक्षण आर्थिक रूप से सामान्य गरीब व्यक्तियों को दिया है अब सवाल यह है य बीजेपी की सियासी चाल है या मजबूरी क्योंकि हाल ही में बीजेपी ने अपने तीन बहुमूल्य राज हाथ से गवाय हैं ऐसा माना जाता है कि स्वर्ण वोट बीजेपी का परंपरिक वोट है पिछले कुछ सालों में बीजेपी का मुंह पिछड़ा अति पिछड़ा की ओर चला गया था इसलिए और एससी एसटी कानून पर अध्यादेश लाकर बीजेपी ने अपने परंपरिक वोटर को नाराज कर दिया था परिणाम स्वरूप बीजेपी ने अपने तीन राज को हाथ से गंवाना पड़े अब बीजेपी को या चिंता सताने लगी है कि कहीं उसका परंपरिक वोटर ही उसे ना छोड़ दे इसलिए उन्होंने आरक्षण के खतरनाक कदम को अपनाया या सही में बीजेपी समान गरीब वर्ग के हितों का ख्याल रखती है या तो आने वाला वक्त ही बताएगा लेकिन जब अत्याधिक मत नोटा को पड़ा तो तमाम सारे राजनीतिक दल ने लोकसभा और राज्यसभा में इस बिल को समर्थन दिया क्योंकि लगभग सभी राजनीतिक दलों को अब इस बात का एहसास हो गया कि गरीब समान वर्ग या सामान्य वर्ग अब एक वोट बैंक बनता चला जा रहा है लेकिन चिंता की बात यह है कि कोई भी राजनीतिक पार्टी अपना ही हित साधने के चक्कर में है है जो देश के लिए खतरनाक कदम है |

नहीं मारना चाहिए था थप्पड़: हरभजन सिंह

करीना और चुनाव…..