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मजबूरी य देश के हित में महागठबंधन

जब से भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी दामोदर दास ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली उसके बाद एक कर एक के बाद तमाम राज्यों के चुनाव जीते गई उससे विपक्षियों में भारी घबराहट देखने को मिला मोदी सरकार या भाजपा सरकार ने लगभग लगभग लगभग विपक्ष नाम की चीज को ही पूरे भारत से खत्म कर दिया अब वह हर एक पार्टी हर एक क्षेत्रीय पार्टी अपने वजूद को बचाने के लिए एक मंच पर सभी को इकट्ठा कर रही है अब इसे आप मजबूरी कहें या देश के हित में गठबंधन इसका तो आकलन आने वाले चुनाव में ही जनता करेगी वरना |

याद कीजिए क्या मजबूरी रही होगी वर्तमान में दिल्ली सरकार का मुखिया स अरविंद केजरीवाल ने डंके की चोट पर कहा था कि हर एक राजनीतिक पार्टियां चोर है आज वही अरविंद केजरीवाल विपक्ष से गठबंधन करने पर कोई गुरेज नहीं है कभी एक दूसरे के धुर विरोधी रहे मुलायम सिंह यादव और बहन कुमारी मायावती एक साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं जिस मायावती ने गेस्ट हाउस कांड के बाद कसम खाई थी कि मिट्टी में मिल जाएंगे दोबारा गठबंधन नहीं करेंगे आज वह सभी मिलकर महागठबंधन का हिस्सा बन रहे हैं पिछले लोकसभा चुनाव में बसपा का कोई भी उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत पाया था इशारा आपके लिए काफी है यह गठबंधन की किन शर्तों पर किन चीजों पर हो रहा है ताजा मामला पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री मायावती ने कोलकाता में एक रैली की और उस रैली में विपक्ष के तमाम वह बड़े नेताओं को एक मंच पर आमंत्रित किया या एक मंच पर लाने की कोशिश की ममता बनर्जी विपक्ष को एक साथ लाने का काम तो बखूबी निभाया परंतु महागठबंधन का चेहरा कौन होगा या किसी नहीं बताया ममता बनर्जी की रैली में हर को तमाम बड़े नेताओं ने देश के सामने यह बोला कि मोदी को हटाओ मोदी को हटाओ परंतु किसी का नहीं बोला कि महागठबंधन में पीएम पद का उम्मीदवार कौन होगा यह तो वही बात हो गई ना बराती चल पड़े हैं दूल्हा कौन है पता नहीं आप इसे महागठबंधन कहिए या स्वार्थ की राजनीति इसे तो आप पर छोड़ते हैं परंतु रैली के बाद ममता दीदी के द्वारा परोसा गया खाना भी बहुत चर्चा का केंद्र बिंदु रहा |

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